महकते जज़्बात…(1)

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इस  दिल  से  उठती  ख़ुश्बू  के  कुछ  कतरे  आपकी

नज़र  करता हूँ…

भाग १

तेरा  नाम  लबों  से  गुज़रे  अरसा  हुआ,

पर  मुस्कुराहट  अभी  बाकी  है ;

कैसे  भुला  दूँ  तुझे  ए  हमनशीं ,

के  चाहत  अभी  बाकी  है ||

♥ ♥ ♥

ढूँढता  हूँ  तुझे  इन  लकीरों  में ,

के  तेरी  ख़्वाहिश  बेइंतहाँ  है ;

है  बसा  तेरा  अक्स  इस  दिल  में ,

पर  जाने  तू  कहाँ  है…जाने  तू  कहाँ  है ||

♥ ♥ ♥

फिर मिलेंगे…

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6 thoughts on “महकते जज़्बात…(1)

  1. Yogi saraswat

    ढूँढता हूँ तुझे इन लकीरों में ,

    के तेरी ख़्वाहिश बेइंतहाँ है ;

    है बसा तेरा अक्स इस दिल में ,

    पर जाने तू कहाँ है…जाने तू कहाँ है ||
    ​स्वागत !!

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  2. Pingback: Couplets: #AtoZChallenge – doc2poet

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