महकते जज़्बात…(3)

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इस दिल से उठती ख़ुश्बू के कुछ और कतरे आपकी नज़र करता हूँ…

भाग ३

ख़्वाब में मिलीं कल नज़रें उनसे,

जाने दो पल में क्या कह गयीं ;

हम अंदाज़-ए-बयाँ पर ही मर मिटे,

और बात अधूरी रह गयी ||

♥ ♥ ♥

ये तू नहीं…तेरी याद है बस,

अब कौन इस दिल को समझाए ;

तेरी जूसतजू ने शायर किया’

एक झलक जाने क्या कर जाए ||

♥ ♥ ♥

बड़ी उम्मीद लिए बैठे थे,

के उनकी आँखों से कोई इशारा तो होता,

तोड़ देते हर रस्म इस ज़माने की,

बस एक बार मुहब्बत से हमें पुकारा तो होता ||

♥ ♥ ♥

फिर मिलेंगे…

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One thought on “महकते जज़्बात…(3)

  1. Pingback: Couplets: #AtoZChallenge – doc2poet

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