मैं संगीत हूँ: #MusicBringsLife

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संगीत की कहानी, संगीत की ज़ुबानी 


बारिश की पहली फुहार, चिड़ियों का गीत मल्हार,

के दरख़्तों की इस हरियाली में, महकता कहीं मैं भी हूँ,

वन में होती हल-चल, और  बहता  पानी  कल-कल,

के असीम  सागर की इन  लहरों में, छलकता कहीं मैं भी हूँ,

भीड़ में होता शोर, और पतंग की कटती डोर,

के घड़ी के काँटों की  इस  रफ़्तार में, थिरकता कहीं मैं भी हूँ,

बीते पल अनमोल, दो प्यार के मीठे बोल,

के इन लबों पे खिलती हँसी में, शामिल कहीं मैं भी हूँ,

गर सुन कोई सके, तो गाती ख़ामोशी भी है यहाँ,

के इस कायनात के हर ज़र्रे को, इस धुन में सजाता मैं ही हूँ,

संगीतमय बनाता मैं ही हूँ , संगीतमय बनाता मैं ही हूँ ||

***

This post is written for Indispire Edition 104: No one can hate music as it uplifts your mood accordingly. Which genre or one is your favourite? You can dediacte the post to a form or an artist too. #MusicBringsLife

31 thoughts on “मैं संगीत हूँ: #MusicBringsLife

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