सिस्कियाँ :#BlogchatterA2Z

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इन कविताओं में कई रंग हैं लेकिन कुछ गमगीन पल राज़ बनकर छुपे भी हैं | उन्हीं पलों को समर्पित कुछ पंक्तियाँ आपकी नज़र करता हूँ…

छलक  जाए  न  इस  दिल  से  कोई  ग़म,

के  अक्सर  यूँही  हँस  लिया  करता  हूँ;

टूट  जाता  था  जिन  पर  आँसुओं  का  बाँध,

उन  जज़्बात  को  कस  लिया  करता  हूँ;

नम-से  कुछ  लम्हे  क़ैद  हैं  इन  यादों  में,

 इनसे  उबर  जाने  को  तरस  लिया  करता  हूँ;

के  पढ़  ले  ना  कोई  मेरी  ये  खामोशियाँ,

हर  पल  बस   यही  अर्ज़ियाँ  करता  हूँ;

इन  खामोशियों  तले  कई  ज़ख़्म  भरने  को  हैं,

के  इनकी  मीठी  टीस  में  भी…रस  लिया  करता  हूँ;

ज़िंदगी  में  खुशियों  का  सूखा  न  पड़े  कभी,

यूँही  कभी  हँसी-कभी  अश्कों  में  बरस  लिया  करता  हूँ ||

♥ ♥ ♥                                   doc2poet

अगर आपको मेरी कविताएँ पसन्द आयें तो मेरी पुस्तक “मन-मन्थन : एक काव्य संग्रह” ज़रूर पढ़ें| मुझे आपके प्यार का इन्तेज़ार रहेगा |

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8 thoughts on “सिस्कियाँ :#BlogchatterA2Z

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