यकीन : #BlogchatterA2Z

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अपने यकीन पर यकीन रखें तो हम सब हासिल कर सकते हैं वरना सपने तो रोज़ टूटते बिखरते हैं और आवाज़ भी नहीं होती |

दुनियादारी  ने  कितने  सपने  डुबो  दिए,
कुछ  जला  दिए  कुछ  धो  दिए,

पर  इन  सपनों  में  अभी  बाकी  थोड़ी  जान  है,
भूले  नहीं  गिर  कर  उठना,
इन  पंखों  में  बची  उड़ान  है,

ये  ख़्वाब  हैं  वो  जो  ग़म  में  भी  मुस्कुराना  जानते  हैं,
ये  वो  नहीं  जो  ठेस  लगी  और  रो  दिए…||

***                                    doc2poet

और अपने आप पर यकीन जताने की कोई उम्र नहीं होती | वो हर वक़्त सही वक़्त है जिसमे हम अपने आप पर यकीन करना शुरू करते हैं |

क्यूँ  जकड़े  इन  ख़्वाबों  को ,
घड़ी  के  इन  दो  काँटों  में,
के  पिंजरे  से  दूर  उड़  जाने  में ,
कभी  देर  नहीं  होती;

  सोते  ख़्वाब  जगाने  में ,
कभी  देर  नहीं  होती,
बचपन  में  लौट  जाने  में,

कभी  देर  नहीं  होती;

उन  लम्हों  को  छू  कर  आने  में,

कभी  देर  नहीं  होती,
फिर  बंधन  में  बँध  जाने  में,

कभी  देर  नहीं  होती;

रोती  आँखों  को  हँसाने  में,

कभी  देर  नहीं  होती,
रुक  कर  इक  पल  मुस्कुराने  में,

कभी  देर  नहीं  होती;

के  जिनके  हों  मज़बूत  इरादे,
पक्के  हों  मंजेधागे,
उनकी  पतंग  के  उड़  जाने  में,

कभी  देर  नहीं  होती,

उनकी  गहरी  रातों  में  भी,
अंधेर  नहीं  होती;

हर  ख़्वाब  को  जी  जाने  में,

कभी  देर  नहीं  होती,
ख़ुद  से  वादे  निभाने  में,

कभी  देर  नहीं  होती…||

***                                    doc2poet

अगर आपको मेरी कविताएँ पसन्द आयें तो मेरी पुस्तक “मन-मन्थन : एक काव्य संग्रह” ज़रूर पढ़ें| मुझे आपके प्यार का इन्तेज़ार रहेगा |

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18 thoughts on “यकीन : #BlogchatterA2Z

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