हर नारी की व्यथा: #HindiPoetry

 

WeavingThreads_247Story of every women who rises from the ashes of her own sufferings as a beacon of light and positivity.


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मैं नारी हूँ, मैं अबला हूँ,

संघर्ष ही मेरा नसीब है;

मैं ही हूँ, बस मेरा सहारा,

दहेज, समाज; बस रक़ीब हैं;

कुचलने में  मेरे अरमान,

इन बेदर्दो को कोई  हर्ज नहीं;

हाथों की लकीरें, भी हैं  नाकाम,

मेरे हिस्से बस हिज्र सही;

जाने क्यूँ? किसने?  ये फर्क किया?

उनको सब खुशियाँ, हमें नर्क दिया !

शायद उसको  भी, है ये पता,

के मुझमें ही, गौरी-काली है ,

कब तक कर पाएंगे, मेरा दमन ?

ये रुत ही बदलने वाली है,

रुत ही बदलने वाली है…||

***

                                                             -©doc2poet

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10 thoughts on “हर नारी की व्यथा: #HindiPoetry

  1. नमस्कार , बहुत अच्छा लगा आपके ब्लाग पर आकर । मैं पिछले 6 साल से लिख रहा हू । पहले भी कई ब्लाग बनाये और फिर बीच मे ब्लाग पर लिखना कम करके अपने लैपटाप पर ही लिखने लगा हू । अब फिर से ब्लाग पर सक्रिय होने जा रहा हू । आपका सहयोग रहेगा तो वापसी अच्छी कर पाऊंगा ।
    मेरे ब्लाग पर आईयेगा,मैं वादा करता हू आपको निराश हो कर नही लौटना पडेगा ।
    ब्लाग की लिंक है :- http://www.chiragkikalam.in/
    धन्यवाद ।

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