बर्बरता : #HindiPoetry

WeavingThreads_247

This may be happening elsewhere in the world also, but I have seen it with my own eyes around here. Have you?

कोख में घुटती सांसें ,

जन्मी बच्ची की लाशें ,

होता ममता का तिरस्कार ,

अपनों से सौतेला व्यव्हार ,

होता होगा, पर और नहीं ,

के अब वो पुराना दौर नहीं,

खुशियों को तरसती दुल्हन,

रिश्तों में बढ़ती उलझन ,

दहेज़ की बेशर्म आग,

बेबस जलता सुहाग,

रिश्तों की चोटिल कहानियां ,

लहूलुहान सुहाग की निशानियां,

होता होगा, पर और नहीं ,

के अब वो पुराना दौर नहीं,

घूरती बेहया नज़रें,

चरित्र को चीरती खबरें,

हर उम्र पे होती बर्बरता ,

मासूमियत खोती निर्मलता,

होता होगा, पर और नहीं ,

के अब वो पुराना दौर नहीं,

मैं सक्षम हूँ, मैं सबला हूँ ,

तलवार हूँ मैं, कोई डोर नहीं ,

अब और नहीं, बस और नहीं,

के अब वो पुराना दौर नहीं…||

***

                                                          -©doc2poet

 

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2 thoughts on “बर्बरता : #HindiPoetry

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