What Women face… : #HindiPoetry

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इतने क़ानून होते हुए भी अगर एक भी बच्ची की जान जाती है तो ये बड़े शर्म की बात है | #FemaleFoeticide

काँटों   के   शहर   में,

फूल   सी   मैं,

कोमल,  चंचल,  सौन्दर्या;

पर   उनकी   नज़र   में,

भूल   थी   मैं…||

***

                                           -doc2poet

मोहब्बत या जंग में जो भी जायज़ होता हो, पर किसी की ज़िंदगी इस तरह बर्बाद करना कभी जायज़ नहीं हो सकता | #AcidAttacks

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मेरे   निश्चय-अंगारों   को ,

तेज़ाब   कहाँ   बुझा   पाया ?

मैं   सुन्दर   थी, मैं  सुन्दर   हूँ;

ये   उनकी   ही   है   कायरता ,

जो   आईना   नहीं   छुपा   पाया ,

आईना   नहीं   छुपा   पाया…||

***

                                  -doc2poet

This post is dedicated to all the courageous women and girl children who face atrocities  like foeticide, acid attacks, criminal abortion etc. on a daily basis. Hope they get the strength to fight against all this. Hope this ends soon…

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BlogchatterA2Z Reflections

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A month long journey that gave me so much…

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See all my A2Z posts here

Made a small video to thank all my followers and readers. Take a peek here 🙂 

All my A2Z posts were Top posts on indiblogger too…

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फिर मिलने की आस लिए BlogchatterA2Z Challenge April 2018 के लिए ये अंतिम भेंट :

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Join me on Instagram for a picturesque poetic journey.

अगर आपको मेरी कविताएँ पसन्द आयें तो मेरी पुस्तक “मन-मन्थन : एक काव्य संग्रह” ज़रूर पढ़ें| मुझे आपके प्यार का इन्तेज़ार रहेगा |

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ज़िंदगी : #BlogchatterA2Z

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Zज़िंदगी  की  पतंग  को  थोड़ा  और  ढील  दे  ग़ालिब,

साँसों  के  धागे  अक्सर  टूट  जाया   करते  हैं…||

***                          doc2poet

ज़िंदगी के आगे किसकी कब चली है…

ख्वाबों  के  बाज़ार  में,
एक  उम्र  ख़र्च  कर  आए  हम,

पर  ख़ता  भी  क्या  इन  लम्हों  की,
जब  ख़्वाब  ही  थे  सजाए  कम,

के  ख़्वाब  तो  तू  जी  भर  के  देख,
किस्मत  को  तो  देख  लेंगे  हम,

अपनी  डगर  यूँही   चलता  चल,
और  हार-जीत  का  मत  कर  ग़म,

ज़िंदगी  से  वफ़ा  की  उम्मीद  न  कर,
और  करनी  भी  है  तो  थोड़ा  कम,

ये  अपने  ही  खेल  दिखाएगी ,
तू  भी  खेल  और  देख  करम,

देख  करम…||

***                          doc2poet

फिर मिलने की आस लिए Blogchatter A2Z Challenge April 2018 के लिए ये अंतिम भेंट :

भोर  है  ये, नहीं  काली  शाम  है,

अंकुश  नहीं, अल्प-विराम  है,

के  रोशन  होगी  सुबह, फिर  रात  के  उस  पार,

जाने  कौनसी  कोपल  फूटें, शब्दों  में  अबकी  बार,

के  ये  हर्फ  तो  बस, प्रेमजल  के  प्यासे  हैं,

ये  स्याही  रंग  बिखेरेगी, जबतक  बाकी  साँसें  हैं,

फिर  लौटेगी  काव्यांजलि, फिर  होगी  बरसात,

फिर  सजेगा  इंद्रधनुष, और  होगा  हमारा  साथ,

होगा  हमारा  साथ ||

***                          doc2poet

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यकीन : #BlogchatterA2Z

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अपने यकीन पर यकीन रखें तो हम सब हासिल कर सकते हैं वरना सपने तो रोज़ टूटते बिखरते हैं और आवाज़ भी नहीं होती |

दुनियादारी  ने  कितने  सपने  डुबो  दिए,
कुछ  जला  दिए  कुछ  धो  दिए,

पर  इन  सपनों  में  अभी  बाकी  थोड़ी  जान  है,
भूले  नहीं  गिर  कर  उठना,
इन  पंखों  में  बची  उड़ान  है,

ये  ख़्वाब  हैं  वो  जो  ग़म  में  भी  मुस्कुराना  जानते  हैं,
ये  वो  नहीं  जो  ठेस  लगी  और  रो  दिए…||

***                                    doc2poet

और अपने आप पर यकीन जताने की कोई उम्र नहीं होती | वो हर वक़्त सही वक़्त है जिसमे हम अपने आप पर यकीन करना शुरू करते हैं |

क्यूँ  जकड़े  इन  ख़्वाबों  को ,
घड़ी  के  इन  दो  काँटों  में,
के  पिंजरे  से  दूर  उड़  जाने  में ,
कभी  देर  नहीं  होती;

  सोते  ख़्वाब  जगाने  में ,
कभी  देर  नहीं  होती,
बचपन  में  लौट  जाने  में,

कभी  देर  नहीं  होती;

उन  लम्हों  को  छू  कर  आने  में,

कभी  देर  नहीं  होती,
फिर  बंधन  में  बँध  जाने  में,

कभी  देर  नहीं  होती;

रोती  आँखों  को  हँसाने  में,

कभी  देर  नहीं  होती,
रुक  कर  इक  पल  मुस्कुराने  में,

कभी  देर  नहीं  होती;

के  जिनके  हों  मज़बूत  इरादे,
पक्के  हों  मंजेधागे,
उनकी  पतंग  के  उड़  जाने  में,

कभी  देर  नहीं  होती,

उनकी  गहरी  रातों  में  भी,
अंधेर  नहीं  होती;

हर  ख़्वाब  को  जी  जाने  में,

कभी  देर  नहीं  होती,
ख़ुद  से  वादे  निभाने  में,

कभी  देर  नहीं  होती…||

***                                    doc2poet

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क्षमा : BlogchatterA2Z

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अपने बारे में बस इतना कहना चाहूँगा…

एकाग्रचित   मैं   प्रगतिशील,
किसी   का   दिल  हूँ   दुखाता   नहीं,

कोई   कुछ   समझे, कोई   न   समझे,
मन-शाँति   मैं   गँवाता   नहीं,

मैं   गर्वित   हूँ, मैं   जो   भी   हूँ,
दिल   में   बात   सजाता   नहीं,

बस   क्षमाप्रार्थी   हूँ   उनका,
जिन   सपनों   को   मैं  जगाता   नहीं…||

***                                 doc2poet

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