ज़िंदगी : #BlogchatterA2Z

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Zज़िंदगी  की  पतंग  को  थोड़ा  और  ढील  दे  ग़ालिब,

साँसों  के  धागे  अक्सर  टूट  जाया   करते  हैं…||

***                          doc2poet

ज़िंदगी के आगे किसकी कब चली है…

ख्वाबों  के  बाज़ार  में,
एक  उम्र  ख़र्च  कर  आए  हम,

पर  ख़ता  भी  क्या  इन  लम्हों  की,
जब  ख़्वाब  ही  थे  सजाए  कम,

के  ख़्वाब  तो  तू  जी  भर  के  देख,
किस्मत  को  तो  देख  लेंगे  हम,

अपनी  डगर  यूँही   चलता  चल,
और  हार-जीत  का  मत  कर  ग़म,

ज़िंदगी  से  वफ़ा  की  उम्मीद  न  कर,
और  करनी  भी  है  तो  थोड़ा  कम,

ये  अपने  ही  खेल  दिखाएगी ,
तू  भी  खेल  और  देख  करम,

देख  करम…||

***                          doc2poet

फिर मिलने की आस लिए Blogchatter A2Z Challenge April 2018 के लिए ये अंतिम भेंट :

भोर  है  ये, नहीं  काली  शाम  है,

अंकुश  नहीं, अल्प-विराम  है,

के  रोशन  होगी  सुबह, फिर  रात  के  उस  पार,

जाने  कौनसी  कोपल  फूटें, शब्दों  में  अबकी  बार,

के  ये  हर्फ  तो  बस, प्रेमजल  के  प्यासे  हैं,

ये  स्याही  रंग  बिखेरेगी, जबतक  बाकी  साँसें  हैं,

फिर  लौटेगी  काव्यांजलि, फिर  होगी  बरसात,

फिर  सजेगा  इंद्रधनुष, और  होगा  हमारा  साथ,

होगा  हमारा  साथ ||

***                          doc2poet

अगर आपको मेरी कविताएँ पसन्द आयें तो मेरी पुस्तक “मन-मन्थन : एक काव्य संग्रह” ज़रूर पढ़ें| मुझे आपके प्यार का इन्तेज़ार रहेगा |

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यकीन : #BlogchatterA2Z

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अपने यकीन पर यकीन रखें तो हम सब हासिल कर सकते हैं वरना सपने तो रोज़ टूटते बिखरते हैं और आवाज़ भी नहीं होती |

दुनियादारी  ने  कितने  सपने  डुबो  दिए,
कुछ  जला  दिए  कुछ  धो  दिए,

पर  इन  सपनों  में  अभी  बाकी  थोड़ी  जान  है,
भूले  नहीं  गिर  कर  उठना,
इन  पंखों  में  बची  उड़ान  है,

ये  ख़्वाब  हैं  वो  जो  ग़म  में  भी  मुस्कुराना  जानते  हैं,
ये  वो  नहीं  जो  ठेस  लगी  और  रो  दिए…||

***                                    doc2poet

और अपने आप पर यकीन जताने की कोई उम्र नहीं होती | वो हर वक़्त सही वक़्त है जिसमे हम अपने आप पर यकीन करना शुरू करते हैं |

क्यूँ  जकड़े  इन  ख़्वाबों  को ,
घड़ी  के  इन  दो  काँटों  में,
के  पिंजरे  से  दूर  उड़  जाने  में ,
कभी  देर  नहीं  होती;

  सोते  ख़्वाब  जगाने  में ,
कभी  देर  नहीं  होती,
बचपन  में  लौट  जाने  में,

कभी  देर  नहीं  होती;

उन  लम्हों  को  छू  कर  आने  में,

कभी  देर  नहीं  होती,
फिर  बंधन  में  बँध  जाने  में,

कभी  देर  नहीं  होती;

रोती  आँखों  को  हँसाने  में,

कभी  देर  नहीं  होती,
रुक  कर  इक  पल  मुस्कुराने  में,

कभी  देर  नहीं  होती;

के  जिनके  हों  मज़बूत  इरादे,
पक्के  हों  मंजेधागे,
उनकी  पतंग  के  उड़  जाने  में,

कभी  देर  नहीं  होती,

उनकी  गहरी  रातों  में  भी,
अंधेर  नहीं  होती;

हर  ख़्वाब  को  जी  जाने  में,

कभी  देर  नहीं  होती,
ख़ुद  से  वादे  निभाने  में,

कभी  देर  नहीं  होती…||

***                                    doc2poet

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क्षमा : BlogchatterA2Z

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अपने बारे में बस इतना कहना चाहूँगा…

एकाग्रचित   मैं   प्रगतिशील,
किसी   का   दिल  हूँ   दुखाता   नहीं,

कोई   कुछ   समझे, कोई   न   समझे,
मन-शाँति   मैं   गँवाता   नहीं,

मैं   गर्वित   हूँ, मैं   जो   भी   हूँ,
दिल   में   बात   सजाता   नहीं,

बस   क्षमाप्रार्थी   हूँ   उनका,
जिन   सपनों   को   मैं  जगाता   नहीं…||

***                                 doc2poet

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वक़्त : #BlogchatterA2Z

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      बहुत लोग शायद जानते न हों पर दिल्ली शहर हम सबकी सोच से पुराना है | अलग-अलग समय में इसे ७ बार बनाया गया है और उन सबके अवशेष आज भी हमारे बीच मौजूद हैं |

गुप्ता राजवंश द्वारा ४०० इ.पू. में क़ुतुब मीनार में लगाया गया मिश्रित धातु का खंबा आज भी ज़ंग से बचा हुआ है | तुघ्लक़ राजवंश का तुघ्लक़ाबाद का क़िला, इब्राहिम लोदी का लोदी गार्डेन, शेर शाह सूरी का पुराना किला, मुगलों का लाल किला और जामा मस्जिद और लुटियन दिल्ली से आज की हमारी नयी दिल्ली सभी अपने आप में एक मिसाल हैं |

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के   जिनके   क़लम-ओ-तलवार   ने   रचा   इतिहास   था,
बे-आबरू   हुए   वो   बिखरे   पन्नों   से   झाँकते   हैं,

अब   तेरी   मेरी   क्या   बिसात   ए   ग़ालिब,
के   मुघलिया   तख़्त   भी   यहाँ   धूल   फाँकते   हैं ||

♥ ♥ ♥                                    doc2poet

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सैंकड़ों   क़िस्से   दफ़्न   हैं   इस   मिट्टी   में,
ज़रा   कुरेदूँ   तो   अश्क    नज़र   आते   हैं,

वो   शान-ओ-शौक़त,   वो   राज-घराने   सब    धूमिल   हैं,
सिंघासन   पर   बैठने   वाले,  अब   फक़त   मुख्तसर   बातें   हैं ||

♥ ♥ ♥                                    doc2poet

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वीर : BlogchatterA2Z

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              ये पंक्तियाँ मैं हर उस सिपाही को समर्पित करता हूँ जो हमारे लिए सीमा पर हर पल अपनी जान हथेली पर लिए बैठे है | हमारी हर साँस उनकी ही देन है |

कविताओं  ने  है  भरी  हुंकार, के  कलम  को  तलवार  बनाया  है,

जो  मिला  नहीं  शृंगार  में, वो  मैने  वीर  रस  में  पाया  है…||

♥ ♥ ♥                              doc2poet

शत  शत  नमन

पास  नहीं  कुछ  भी  देने  को,
मैं  अपना  यौवन  देता  हूँ,

सब  रिश्ते-नातों  के  उपर  मैं,
धरती  माँ  का  बेटा  हूँ,

सर  कट  जाए, धड़  माने  न  हार,
मैं  अटूट  वचन  ये  देता  हूँ,

साँसें  गर  ये  पर्याप्त  नहीं,
मैं  सातों  जीवन  देता  हूँ,

हर  ‘कैसे?’  ‘क्यूँ?’  का   उत्तर  मैं,
जय   हिन्द   कह   कर  देता   हूँ,

वन्दे   मातरम   देता   हूँ ||

♥ ♥ ♥                                 doc2poet

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