शुभ दीपावली

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दीपावली के शुभ अवसर पर…


होकर  विजयी  प्रभु  राम  हैं  लौटे,

के  दीवाली  का  त्यौहार  है  यहाँ, 

आतिशबाज़ी  की  चकाचौंध  तो  है,

पर  धुएँ  के  गुबार  हैं  यहाँ, 

फ़ेसबुक  दुआओं  से  सुसज्जित  है,

पर  परिजनों  का  तिरस्कार  है  यहाँ,

हर  द्वारे  दीपक  जगमग  हैं,

पर  सड़कों  पर  मरता  कुम्हार  है  यहाँ,

लक्ष्मी जी का पूजन है,

पर दहेज प्रथा की मार है यहाँ, 

के  देसी  घी  के  लड्डू  हैं,

पर  खाकर  इन्हें  बीमार  हैं  यहाँ,

पकवानों  से  फ़िज़ा  महकती  है,

पर  भूखों  की  कतार  हैं  यहाँ,

ख़ूब  सजे  हैं  चौक- चौबारे,

हर  जेब  में  लेकिन  उधार  है  यहाँ, 

दो  नावों  पर  सवार  हैं  सब,

और  जाने  गुम  पतवार  है  कहाँ,

के  हम  हैं, तुम  हो  और  दीपावली,

देखें  किस  करवट मझधार  है  यहाँ…

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This post is written for Indispire Edition 90: We have been celebrating Diwali in the same age old manner for hundreds of years with crackers, oily sweets, heavy, unhealthy foods, gambling and what not. So it’s it time that we changed it? So if you were to rewrite the Diwali Celebrations #changingdiwali