माँ : #Mother’sDay


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Mothers never leave your side. If you can feel the warmth of their love, you are on the right path. Happy mothers day.

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PS: This one is the closest to my heart. If you have ever liked any of my poem, you will love this one. And if you are here for the first time, the archive is on the right…

M                   अपने आँसुओं को जग की आँखों से छुपाकर पी जाना मैने बहुत पहले ही सीख लिया था | लेकिन कुछ बातें कभी नहीं छुपाई जा सकती | मेरे जीवन का सबसे दुखद लम्हा वह था जब उनका साया मेरे सर से रूठ गया | आज भी रह-रह कर वही पल अक्सर मेरी कविताओं में लौट आता है…

के  जितना था मुझसे दुलार,

करती थी जितना मुझसे प्यार;

मुझे एक बार और बाहों में भरने को,

वो  दरिया-ए-आग  मे  भी  उतरती;

होता  गर  बस  मे  उसके,

तो  चन्द  साँसें  और  ज़रूर  भरती;

अपने  लिए  न  सही,

मेरे  लिए  तो  ज़रूर  करती |

वो …

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राबता : #BlogchatterA2Z

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              ये पंक्तियाँ मैंने अपनी पहली और आख़री प्रेमिका और संजोग से मेरी धर्म पत्नी की शान में कुछ वर्ष पहले लिखी थी | मुझे खुशी है कि ये आज भी उतनी ही रूमानी हैं जितनी उस समय थीं |

ख़यालों   ने   उनके   सताया   है   इस   क़दर,

के  राबता  हो  उनसे, तो  पूछेंगे  ज़रूर,

के तराशा  है  तुम्हें, खुद  उस  ख़ुदा  ने,

या  हो  तुम  परी, या  कोई  हूर |

है  तुमसे  ही  धड़कन  इस  दिल  की,

और  तुम्ही  से  इन  आँखों  का  नूर,

के  मर  ही  मिटा  तुमपर,

तो  इस  दिल  का  क्या  क़सूर |

इस  दिल  ने  ही  दिखाई  अंधेरों  में,

नज़रों  को  राहें  तमाम  हैं,

माना  हुई  है  इससे  ख़ता,

पर  क़ुबूल  हमें  भी  ये  इल्ज़ाम  है |

न  जाने  हुआ  ये  कैसे,

के  एक   ही   झलक  में  दिल-ओ-जान  गवाँ  बैठे,

अजनबी  हुए  ख़ुद  से,  और  उन्हें  भगवान  बना  बैठे |

जादू  चला कुछ  इस  तरह,

के  हम रहे  नहीं  हम,

मिल  जाए  पर उनका   साथ  अगर,

तो ख़ुद को खोने का भी नहीं ग़म |

नज़रों   में  उनकी  छलकती  मेरी  तस्वीर  सा  नशा,

किसी   पैमाने   में  कहाँ,

के  मुहब्बत  की  इस  बेखुदी  सा   मज़ा,

होश  में  आने  में  कहाँ |

बयाँ   कर  पाना   मुम्किन  नहीं,

के  बीते  कैसे  बरसों,  इन  नज़रों  की  तलाश  में,

ज़िंदा  होने  के  इल्ज़ाम  तले,

चल थी  रही  साँसें, ज़िंदगी  की  आस  में |

के  लौ  सी   तपती  धूप  में,

राहत शाम  में  हमने  पाई  है,

गुज़र  गये  झुलस्ते  मंज़र,

के  जीवन  में  शब  लौट  आई  है |

सजदा  करूँ  मैं  पल-पल  उनका,

जो  शख़्सियत  ही  ख़ुदाया  है,

के   याकता  वो  हीर,

जिसने  इस  दिल  को  सजाया  है,

हर पल को महकाया है ||

♥ ♥ ♥                                  doc2poet

ये इस कविता का अंत नहीं, बल्कि इस प्रेम कहानी का आगाज़ है…

अगर आपको मेरी कविताएँ पसन्द आयें तो मेरी पुस्तक “मन-मन्थन : एक काव्य संग्रह” ज़रूर पढ़ें| मुझे आपके प्यार का इन्तेज़ार रहेगा |

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माँ : BlogchatterA2Z

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PS: This one is the closest to my heart. If you have ever liked any of my poem, you will love this one. And if you are here for the first time, the archive is on the right…

M                   अपने आँसुओं को जग की आँखों से छुपाकर पी जाना मैने बहुत पहले ही सीख लिया था | लेकिन कुछ बातें कभी नहीं छुपाई जा सकती | मेरे जीवन का सबसे दुखद लम्हा वह था जब उनका साया मेरे सर से रूठ गया | आज भी रह-रह कर वही पल अक्सर मेरी कविताओं में लौट आता है…

के  जितना था मुझसे दुलार,

करती थी जितना मुझसे प्यार;

मुझे एक बार और बाहों में भरने को,

वो  दरिया-ए-आग  मे  भी  उतरती;

होता  गर  बस  मे  उसके,

तो  चन्द  साँसें  और  ज़रूर  भरती;

अपने  लिए  न  सही,

मेरे  लिए  तो  ज़रूर  करती |

वो  रूठना, वो  मनाना ,

वो  डांट कर फिर प्यार जताना;

ऐसे  पल-दो-और-पलों  के  लिए,

वो  कुछ  भी  कर  गुज़रती;

होता  गर  बस  मे  उसके,

तो  स्वयं  काल  के  प्राण  भी  हरती;

अपने  लिए  न  सही,

मेरे  लिए  तो  ज़रूर  करती|

पर  भाग्य  की  थी  कुछ  और  ही  रज़ा,

मेरे  रंगों  मे  जैसे  कालिख  ही  भर  दी;

के  ग़म  तो  उसने  थोक  ही  दिए,

पर  ममता  केवल  फुटकर   दी;

होता  गर  बस  मे  उसके,

तो  समय  की  रेत  से  द्वंद  भी  वो  करती;

अपने  लिए  न  सही,

मेरे  लिए  तो  ज़रूर  करती,

मेरे  लिए  तो  ज़रूर  करती||

♥ ♥ ♥                                     doc2poet

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कर्तव्य : BlogchatterA2Z

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K              ये पंक्तियाँ समर्पित हैं मेरे पुत्र कर्तव्य की मीठी मुस्कान को, उसकी नादान शरारतों को, उसकी हर एक बात को जिसमें मैं अपना भविष्य, अपना प्रतिबिम्ब, अपना सब कुछ देखता हूँ |

तू  काव्य  मेरा, कर्तव्य  मेरा,
तू  भूत, वर्तमान, भविष्य  मेरा;

तू  अठखेली, तू  ही  बचपन,
उगता  सूरज  तू  भव्य  मेरा;

तू  गर्व  मेरा, ऐश्वर्य  मेरा,
तुझसे  ही  भाग्य  अदम्य  मेरा;

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My son- Kartavya

तुझसा  दूजा  कोई  भी  नहीं,
के  तू  है  प्रदेय  अनन्य  मेरा;

मैं  चलूँ  तू  मंज़िल  पा  जाए,
के  तू  ही  है  गंतव्य  मेरा,   

कर्तव्य  मेरा,  गंतव्य  मेरा||

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जुस्तजू : #BlogchatterA2Z

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Jयह वो समय था जब मैं लड़कपन के जोश में, बेबाक, बेफिक्र, मदमस्त हाथी की तरह चला जा रहा था | संतुष्ट जीवन की छाँव तले मेरे ह्रदय में बस एक ही आस थी | उन हसीन पलों में हर रंग थोड़ा और रंगीन लगता है, हर चेहरा आफरीन लगता है, इन हवाओं में एक नशा सा घुल जाता है और हर स्वाद तोड़ा और नमकीन लगता है |

इस  दिल  से  उठती  ख़ुश्बू  के  कुछ  कतरे  आपकी नज़र  करता हूँ: 

तकते  थे  राह  उनकी,

इस   कशमकश  में  यूँही  ग़ज़ल  बन  गयी,

के   दिल  में  उठा  एक  ख़याल,

और  मुश्किल  ख़ुद  हल  बन  गयी ||

♥ ♥ ♥                                       doc2poet

वो   कहते   हैं   तू   ख़याल   है   बस,

इस   पागल   दिल   का   फ़ितूर   है   तू,

पर   ज़िंदा   हूँ   मैं, खुद   सुबूत   है   ये ,

के   शायद   कहीं   ज़रूर   है   तू ||

♥ ♥ ♥                                       doc2poet

ढूँढता  हूँ  तुझे  इन  लकीरों  में,

के  तेरी  ख़्वाहिश  बेइंतहाँ  है ,

  बसा  है  तेरा  अक्स  इस  दिल  में,

पर  जाने  तू  कहाँ  है, जाने  तू  कहाँ  है ||

♥ ♥ ♥                                       doc2poet

तेरे   ख़यालों   में   ऐसा   डूबा,

जैसे   वर्षा   घनघोर   हुई,

जाने   कब   बीती   रात ,

और   जाने   कब   भोर   हुई ||

♥ ♥ ♥                                       doc2poet

तेरा  नाम  लबों  से  गुज़रे  अरसा  हुआ,

पर  मुस्कुराहट  अभी  बाकी  है,

कैसे  भुला  दूँ  तुझे  ए  हमनशीं,

के  चाहत  अभी  बाकी  है ||

♥ ♥ ♥                                       doc2poet

ख़्वाब  में  मिलीं  कल नज़रें उनसे,

जाने दो पल में क्या कह गयीं,

हम अंदाज़-ए-बयाँ पर ही मर मिटे,

और बात अधूरी रह गयी ||

♥ ♥ ♥                                       doc2poet

ये  तू  नहीं, तेरी  याद है बस,

अब  कौन इस दिल को समझाए,

तेरी  जुस्तजू ने शायर  किया,

एक  झलक  जाने  क्या कर जाए ||

♥ ♥ ♥                                       doc2poet

अगर आपको मेरी कविताएँ पसन्द आयें तो मेरी पुस्तक “मन-मन्थन : एक काव्य संग्रह” ज़रूर पढ़ें| मुझे आपके प्यार का इन्तेज़ार रहेगा |

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