वीर : BlogchatterA2Z

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              ये पंक्तियाँ मैं हर उस सिपाही को समर्पित करता हूँ जो हमारे लिए सीमा पर हर पल अपनी जान हथेली पर लिए बैठे है | हमारी हर साँस उनकी ही देन है |

कविताओं  ने  है  भरी  हुंकार, के  कलम  को  तलवार  बनाया  है,

जो  मिला  नहीं  शृंगार  में, वो  मैने  वीर  रस  में  पाया  है…||

♥ ♥ ♥                              doc2poet

शत  शत  नमन

पास  नहीं  कुछ  भी  देने  को,
मैं  अपना  यौवन  देता  हूँ,

सब  रिश्ते-नातों  के  उपर  मैं,
धरती  माँ  का  बेटा  हूँ,

सर  कट  जाए, धड़  माने  न  हार,
मैं  अटूट  वचन  ये  देता  हूँ,

साँसें  गर  ये  पर्याप्त  नहीं,
मैं  सातों  जीवन  देता  हूँ,

हर  ‘कैसे?’  ‘क्यूँ?’  का   उत्तर  मैं,
जय   हिन्द   कह   कर  देता   हूँ,

वन्दे   मातरम   देता   हूँ ||

♥ ♥ ♥                                 doc2poet

अगर आपको मेरी कविताएँ पसन्द आयें तो मेरी पुस्तक “मन-मन्थन : एक काव्य संग्रह” ज़रूर पढ़ें| मुझे आपके प्यार का इन्तेज़ार रहेगा |

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उड़ान : BlogchatterA2Z

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जीने के लिए जैसे हवा, पानी, भोजन ज़रूरी है वैसे ही कम से कम एक सपना तो ज़रूर होना चाहिए | एक ऐसा सपना जो आपको चैन से सोने न दे, आपको एक बार और उठकर चने की प्रेरणा दे | चाहे सपना छोटा हो या बड़ा, सपना तो सपना होता है जिसके बिना ये जीवन जैसे अधूरा ही है |

उड़ने दो मेरे सपनों को,

के घर इनका आकाश है;

मत जकड़ो इन्हें लकीरों में,

के ध्येय इनका बस तलाश है;

इनके जानिब संतोष नहीं,

के हँसती इनकी कुछ ख़ास है;

मंज़िल से इनका क्या नाता,

इनको चलने की बस प्यास है;

के मंज़िल में क्या रखा है,

गर सफ़र पे अपने नाज़ है;

के गीत कई गुनगुनाने हैं अभी,

और समय ही अपना साज़ है ||

♥ ♥ ♥ doc2poet

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तिश्नगी : #BlogchatterA2Z

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मुक़म्मल जहाँ की प्यास किसे नहीं है | हम दिन रात बस थोड़ी और खुशी, थोड़े और रुपये, थोड़े इसकी थोड़े उसकी आस में बिता देते हैं | पर इस प्यास को बुझा पाना जितना आसान है उतना ही मुश्किल भी |

मुकम्मल जहाँ की तलाश में,

फिरते रहे मारे-मारे ;

कैसे मिले जो खोया ही नहीं,

हर पल पास है हमारे;

बस आँखें बंद करने की देरी है,

जी उठेंगे दिलकश नज़ारे;

के लड़खड़ाते कदम राह अपनी ढूंड ही लेंगे,

कभी यादों की भीड़ में, कभी तनहाई के सहारे ||

♥ ♥ ♥ doc2poet

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सिस्कियाँ :#BlogchatterA2Z

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इन कविताओं में कई रंग हैं लेकिन कुछ गमगीन पल राज़ बनकर छुपे भी हैं | उन्हीं पलों को समर्पित कुछ पंक्तियाँ आपकी नज़र करता हूँ…

छलक  जाए  न  इस  दिल  से  कोई  ग़म,

के  अक्सर  यूँही  हँस  लिया  करता  हूँ;

टूट  जाता  था  जिन  पर  आँसुओं  का  बाँध,

उन  जज़्बात  को  कस  लिया  करता  हूँ;

नम-से  कुछ  लम्हे  क़ैद  हैं  इन  यादों  में,

 इनसे  उबर  जाने  को  तरस  लिया  करता  हूँ;

के  पढ़  ले  ना  कोई  मेरी  ये  खामोशियाँ,

हर  पल  बस   यही  अर्ज़ियाँ  करता  हूँ;

इन  खामोशियों  तले  कई  ज़ख़्म  भरने  को  हैं,

के  इनकी  मीठी  टीस  में  भी…रस  लिया  करता  हूँ;

ज़िंदगी  में  खुशियों  का  सूखा  न  पड़े  कभी,

यूँही  कभी  हँसी-कभी  अश्कों  में  बरस  लिया  करता  हूँ ||

♥ ♥ ♥                                   doc2poet

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राबता : #BlogchatterA2Z

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              ये पंक्तियाँ मैंने अपनी पहली और आख़री प्रेमिका और संजोग से मेरी धर्म पत्नी की शान में कुछ वर्ष पहले लिखी थी | मुझे खुशी है कि ये आज भी उतनी ही रूमानी हैं जितनी उस समय थीं |

ख़यालों   ने   उनके   सताया   है   इस   क़दर,

के  राबता  हो  उनसे, तो  पूछेंगे  ज़रूर,

के तराशा  है  तुम्हें, खुद  उस  ख़ुदा  ने,

या  हो  तुम  परी, या  कोई  हूर |

है  तुमसे  ही  धड़कन  इस  दिल  की,

और  तुम्ही  से  इन  आँखों  का  नूर,

के  मर  ही  मिटा  तुमपर,

तो  इस  दिल  का  क्या  क़सूर |

इस  दिल  ने  ही  दिखाई  अंधेरों  में,

नज़रों  को  राहें  तमाम  हैं,

माना  हुई  है  इससे  ख़ता,

पर  क़ुबूल  हमें  भी  ये  इल्ज़ाम  है |

न  जाने  हुआ  ये  कैसे,

के  एक   ही   झलक  में  दिल-ओ-जान  गवाँ  बैठे,

अजनबी  हुए  ख़ुद  से,  और  उन्हें  भगवान  बना  बैठे |

जादू  चला कुछ  इस  तरह,

के  हम रहे  नहीं  हम,

मिल  जाए  पर उनका   साथ  अगर,

तो ख़ुद को खोने का भी नहीं ग़म |

नज़रों   में  उनकी  छलकती  मेरी  तस्वीर  सा  नशा,

किसी   पैमाने   में  कहाँ,

के  मुहब्बत  की  इस  बेखुदी  सा   मज़ा,

होश  में  आने  में  कहाँ |

बयाँ   कर  पाना   मुम्किन  नहीं,

के  बीते  कैसे  बरसों,  इन  नज़रों  की  तलाश  में,

ज़िंदा  होने  के  इल्ज़ाम  तले,

चल थी  रही  साँसें, ज़िंदगी  की  आस  में |

के  लौ  सी   तपती  धूप  में,

राहत शाम  में  हमने  पाई  है,

गुज़र  गये  झुलस्ते  मंज़र,

के  जीवन  में  शब  लौट  आई  है |

सजदा  करूँ  मैं  पल-पल  उनका,

जो  शख़्सियत  ही  ख़ुदाया  है,

के   याकता  वो  हीर,

जिसने  इस  दिल  को  सजाया  है,

हर पल को महकाया है ||

♥ ♥ ♥                                  doc2poet

ये इस कविता का अंत नहीं, बल्कि इस प्रेम कहानी का आगाज़ है…

अगर आपको मेरी कविताएँ पसन्द आयें तो मेरी पुस्तक “मन-मन्थन : एक काव्य संग्रह” ज़रूर पढ़ें| मुझे आपके प्यार का इन्तेज़ार रहेगा |

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