Fighting #covid19 with poetry


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Hey everyone!

I have been busy during the last few days when my family was fighting from home with the covid19 pandemic. I was on off yesterday when I realized how tough it is to stay at home with so little to do. I am sure everything you ever wanted to do, is not so tempting anymore and that’s why I am here after such a big hiatus. whereas I am itching to write new ones, we still have a long way to go. So here is a soft copy of my ebook for you all to aid you in your fight from home.

Illusions Of Inner Paint
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मन मन्थन- Ebook

Also, you may browse though the blog posts to your liking. Don’t forget to share if you like it.

Stay safe and keep fighting.

Teacher’s Day

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Respected Teachers,

Heartiest congratulations on this Teacher’s day. Hope you had a great day. Wish you a lot more years of accomplishment and joy. Thank you for being there for your students. Here’s a poem dedicated to all the teachers:

है शिक्षक खङा,

है शिक्षक लङा,

वक़्त के दुर्गम काँटों से ,

अज्ञानता के सन्नाटों से ,

दिशाहीन भविष्य की राहों में ,

सपने न हों जब निगाहों में ,

है शिक्षक खङा,

है शिक्षक लङा;

 

ज्ञान के बहते सागर में ,

प्रेम से छलकती गागर में ,

उन भूली बिसरी यादों में ,

कुछ खट्टी मीठी बातों में ,

काठ की पतली सन्टी में ,

क्लास ख़त्म की घण्टी में  ,

है शिक्षक खङा,

है शिक्षक लङा;

 

नम्बर पाने की होङ में ,

कुछ कर जाने की दौङ में ,

भगवत गीता के सार में ,

कान पकड़ फटकार में ,

गिरते-पङते हालात में ,

जीत में उमङे जज़्बात में ,

है शिक्षक खङा,

है शिक्षक लङा;

 

है कार्य बङा, पर तू मत डर ,

चल चलता चल, कुछ कर गुज़र ,

है साथ तेरे सब शिक्षकगण ,

लिये ज्ञान, प्रेम और  सुन्दर मन ,

समय हो गर विपदा में पङा,

तो हाथ बढ़ा, है शिक्षक खङा ,

हाथ बढ़ा, है शिक्षक खङा …||

                         -doc2poet

बर्बरता : #HindiPoetry

WeavingThreads_247

This may be happening elsewhere in the world also, but I have seen it with my own eyes around here. Have you?

कोख में घुटती सांसें ,

जन्मी बच्ची की लाशें ,

होता ममता का तिरस्कार ,

अपनों से सौतेला व्यव्हार ,

होता होगा, पर और नहीं ,

के अब वो पुराना दौर नहीं,

खुशियों को तरसती दुल्हन,

रिश्तों में बढ़ती उलझन ,

दहेज़ की बेशर्म आग,

बेबस जलता सुहाग,

रिश्तों की चोटिल कहानियां ,

लहूलुहान सुहाग की निशानियां,

होता होगा, पर और नहीं ,

के अब वो पुराना दौर नहीं,

घूरती बेहया नज़रें,

चरित्र को चीरती खबरें,

हर उम्र पे होती बर्बरता ,

मासूमियत खोती निर्मलता,

होता होगा, पर और नहीं ,

के अब वो पुराना दौर नहीं,

मैं सक्षम हूँ, मैं सबला हूँ ,

तलवार हूँ मैं, कोई डोर नहीं ,

अब और नहीं, बस और नहीं,

के अब वो पुराना दौर नहीं…||

***

                                                          -©doc2poet

 

हर नारी की व्यथा: #HindiPoetry

 

WeavingThreads_247Story of every women who rises from the ashes of her own sufferings as a beacon of light and positivity.


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मैं नारी हूँ, मैं अबला हूँ,

संघर्ष ही मेरा नसीब है;

मैं ही हूँ, बस मेरा सहारा,

दहेज, समाज; बस रक़ीब हैं;

कुचलने में  मेरे अरमान,

इन बेदर्दो को कोई  हर्ज नहीं;

हाथों की लकीरें, भी हैं  नाकाम,

मेरे हिस्से बस हिज्र सही;

जाने क्यूँ? किसने?  ये फर्क किया?

उनको सब खुशियाँ, हमें नर्क दिया !

शायद उसको  भी, है ये पता,

के मुझमें ही, गौरी-काली है ,

कब तक कर पाएंगे, मेरा दमन ?

ये रुत ही बदलने वाली है,

रुत ही बदलने वाली है…||

***

                                                             -©doc2poet

माँ : #Mother’sDay


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Mothers never leave your side. If you can feel the warmth of their love, you are on the right path. Happy mothers day.

doc2poet

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PS: This one is the closest to my heart. If you have ever liked any of my poem, you will love this one. And if you are here for the first time, the archive is on the right…

M                   अपने आँसुओं को जग की आँखों से छुपाकर पी जाना मैने बहुत पहले ही सीख लिया था | लेकिन कुछ बातें कभी नहीं छुपाई जा सकती | मेरे जीवन का सबसे दुखद लम्हा वह था जब उनका साया मेरे सर से रूठ गया | आज भी रह-रह कर वही पल अक्सर मेरी कविताओं में लौट आता है…

के  जितना था मुझसे दुलार,

करती थी जितना मुझसे प्यार;

मुझे एक बार और बाहों में भरने को,

वो  दरिया-ए-आग  मे  भी  उतरती;

होता  गर  बस  मे  उसके,

तो  चन्द  साँसें  और  ज़रूर  भरती;

अपने  लिए  न  सही,

मेरे  लिए  तो  ज़रूर  करती |

वो …

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