क़लम और मैं: #sketching

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अर्से बाद ये कलम,

खुल कर साँस ले पाया है,

कहने को था जो बेताब,

वो आज गाकर सुनाया है ;

के ज़ेहन में था एक ख़याल,

वो आज काग़ज़ पर उतर आया है |

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