क़ुर्बत-ए-स्याही : #BlogchatterA2Z

q
Top post on IndiBlogger, the biggest community of Indian Bloggers

Q

इतने समय से लिखते हुए अब ये महसूस होने लगा है कि मेरा और काव्य का कोई न कोई नाता ज़रूर है…

इन  अल्फाज़ों  का  काग़ज़  से  ज़रूर  कोई  नाता  है,
के  मिलती  नहीं  जिसे  ज़बान, वो  अनायास  ही  इसपर  उतर  आता  है ||

♥ ♥ ♥                                doc2poet

कैसे  न  लिखूं  ?

चाँद  सा  धवल  ये  काग़ज़,

बेचैन  लहरों   सी  मचलती  स्याही,

कैसे  ना  उठे  लफ़्ज़ों  का  तूफान,

हर  ज़र्रा  दे  संयोग  की  गवाही,

जैसे  रूह   को  मिल  गया  हो  इलाही,

रूह   को  मिल  गया  हो  इलाही ||

♥ ♥ ♥                                doc2poet

काव्य- हाइकू

खुला  नीला  आकाश,

अंतर्मन  की  उड़ान,

शब्दों  ने  रूप  लिया  काव्य  का ||

♥ ♥ ♥                                doc2poet

अगर आपको मेरी कविताएँ पसन्द आयें तो मेरी पुस्तक “मन-मन्थन : एक काव्य संग्रह” ज़रूर पढ़ें| मुझे आपके प्यार का इन्तेज़ार रहेगा |

1qws (2)
Buy online

काव्य : #Inspiredtoblog

inspire_wallpaper_by_lifeendsnow-d31ipf8

Poetry is eternal poetry is pure, give me pen and close the door;
Have a lot to say but time no more, Just let it flow and let me roar…

मेरी प्रेरणा

मैं शायर तो नहीं ,

पर इन जज़्बात का इस काग़ज़ से ज़रूर कोई नाता है;

के लोग समझ पाते नहीं जो एहसास,

वो अनायास ही इसपर उतर आता है,

के पानी सा इनमें घुल जाता है

हर ख़याल जो दिल को सताता है

 अल्फ़ाज़ नहीं, के ये आईना हैं

जिनमें ज़हन में उड़ता, हर ख़्वाब नज़र आता है

कभी परवाज़ है ये, कभी धूमिल है

कभी गुम्सुम सा है, तो बेबाक कभी गीत सुनाता है

के ये मुझसे हैं, मैं इनसे हूँ

मिलते हैं एहसास, और फसाना बन जाता है…

***

This post is written for Indispire Edition 95: What inspired you to start blogging ? How is your experience in this blogging world. What have you achieved through it.. #inspiredtoblog

फ़लसफा ज़िंदगी का #3words

life_goes_on

जीवन के सभी सबक जैसे इन तीन शब्दों समाए हैं

“Life Goes On”

समय बलवान है और किसी के लिए नहीं रुकता|यह वो मरहम है जिससे हर घाव भर जाते हैं| यह बात छोटी सी ज़रूर है पर बहुत गहरी भी है|

इसी संदेश को कविता के रूप में कुछ इस तरह पिरोया है…

सुनहरे सपनों की आड़ में,
ज़िंदगी के रंगीन पल, गुप-छुपकर निकल जाते हैं ;

गिर कर उठना तो याद रहता है,
भूल जाते हैं…जब लड़खडाकर सम्भल जाते हैं ;

ये पल धुंधली यादें बनकर ,
होठों  पर कभी झिलमिलाते हैं ;

और कभी आँसू बनकर ,
आँखों में पिघल आते हैं ;

वक़्त से इस कशमकश में ,
दिल-ए-नादान मुस्कुरा ही लेता है ;

बस खुशी के पैमाने बदल जाते हैं…
खुशी के पैमाने बदल जाते हैं ||

ψ ψ ψ

This post is a part of Write Over the Weekend, an initiative for Indian Bloggers by BlogAdda. WOW prompt – ‘My 3 favourite words and why!’

wowbadge